वो प्रेम में है ,
घंटो बैठ बतियाती उससे ,
क्या ये वज़ह काफी नही ,
उसके प्रेम में होने के लिए ....
वो प्रेम में है ,
अक्सर साथ दिख जाती उसके ,
क्या ये भी तर्क सटीक नही ,
उसके प्रेम में होने के लिए ...
वो प्रेम में है ,
कि बिना बात मुस्काती है ,
क्या ये पुख्ता सबूत नही ,
उसके प्रेम में होने के लिए ...
वो प्रेम में है ,
ये बात फैलाते है ,
क्या ये मुद्दा काफी नही ,
उसको भटकाने के लिए ...
वो प्रेम में है ,
आग लगी है ये चारों ओर ,
पर कोई फर्क नही उसे ,
क्या ये रवैया काफी नही ,
उसके आगे बढ़ने के लिए ....
©ज्योति
#मोहब्बतएज़िन्दगी
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