जब बच्चे बड़े होने लगते है ,
माँ बाप असुरक्षित होने लगते ,
असुरक्षित होने लगता है ,
उनका भविष्य , उनके अधिकार ....
जब बच्चे बड़े होने लगते है ,
लुप्त हो जाते है संस्कार ,
लुप्त होने लगती है ,
बचपन में मिली सीख , नसीहत ..
जब बच्चे बड़े होने लगते है ,
बदल जाती है प्राथमिकताएं ,
खत्म हो जाते है ,
सारे आदर्श , सारी अपेक्षाएं ....
मै बड़ी हो रही हूँ ,
और देखती हूँ ,
असुरक्षा का भाव ,
हर माता-पिता की आँखों में ...
मै बड़ी हो रही हूँ ,
और बदलने नही दूंगी ,
अपनी प्राथमिकता ,
अपने संस्कार ,
ख़त्म नही होने दूंगी ,
अपने आदर्श....
©ज्योति