Friday, 6 January 2023

हर औरत स्त्री नहीं होती

ओढ़ कर शरीर मादा का
अपने मस्तिष्क में
नरबुद्धि पालती हुई औरत
स्त्री नहीं होती......

पीढ़ी-दर-पीढी संस्कार
परंपरा के नाम पर
स्त्री को छलती औरत
स्त्री नहीं होती .....

अपने जीवन का सारा दर्द
दूसरी पीढ़ी को
हस्तांतरित करती औरत
स्त्री नहीं होती .....

पर्दे को हया का नाम दे
किसी की पहचान 
कैद करती औरत 
स्त्री नहीं होती .....

किसी की हँसी को
बेहयाई का नाम दे
जीवन उदास करती औरत
स्त्री नहीं होती .....

मुँह से निकलते शब्दों को
वापस हलक में अटका
किसी को गूंगा करती औरत
स्त्री नहीं होती ...

स्त्री होना आसान नहीं 
निकालनी पड़ती है 
मस्तिष्क से नरबुद्धि 
स्त्री का साथ देने को....

दूसरी स्त्री की मुस्कान में 
खोजनी पड़ती है अपनी खुशी
और बनना पड़ता है कभी-कभी
दूसरे के लिए शब्द अर्थ और वाक्य भी.....

छद्म अलंकारों को नकार कर
ध्वनि को ही रस मान
देना पड़ता है 
किसी के जीवन को सौंदर्य ....

मुश्किल होती होगी शायद
स्त्री होने की ये प्रक्रिया
शायद यही है वजह 
हर औरत स्त्री नहीं होती.....

©ज्योति 

Thursday, 5 January 2023

अब और नहीं

तुम स्त्री हो
तुम जब-जब सोचोगी 
जीवन में स्नेह
तब-तब मिलेगा तुम्हें सब कुछ
सिवाय प्रेम के ....

अपना सब कुछ कर न्योछावर
जब तुम कहोगी प्रेम
तुम्हें मिलेगा जवाब-
नया कुछ नहीं है तुममें
तुम स्त्री हो फ़र्ज़ है तुम्हारा

पीड़ा की लहर से
जब ठहरने लगेगा शरीर
तुम कहोगी दर्द-
तुम्हें मिलेगा ताना 
समय से पहले बुढ़िया होने का....

बिना किसी गलती के 
मिलने पर सजा 
जब तुम कहोगी अन्याय-
तुम्हें मिलेगा उलाहना
सहनशक्ति न होने का ....

अपने भीतर के बीज के
अंकुरण से पहले ही मर जाने पर
जब तुम कहोगी सेहत-
तुम्हें मिलेगी तुलना
विश्व भर की औरतों से ....

इन तानों, उलाहनों, तुलना से
जब थकोगी तुम 
और कहोगी अब बस और नहीं-
तुम्हें मिलेगी तसल्ली
अपने लिए खुद खड़े होने की ...

©ज्योति

Tuesday, 3 January 2023

इकलौती बेटियां

इकलौती बेटियां

इकलौती बेटियां नहीं होती
कभी किसी परिवार का हिस्सा
वे तो होती है बस
इकलौती नाम का 'ठप्पा'
जिसे नहीं होता हक़
एक साथ दो परिवार को अपना कहने का....

इकलौती बेटियां होती है
इक अंतहीन सफर-सी
जिसकी ज़िंदगी यहीं सोचते
हो जाती है ख़त्म
के उसे नहीं है हक़
ज़रा भी अपने बारे में सोचने का ....

इकलौती बेटियां होती है
एक मुक्केबाज़ के पंचिंग बैग सी
जिसे जब-तब सहना होता है
कुछ तानों का दंश
क्योंकि नहीं होता उसे ये हक़
के वो ले सके पक्ष अपने माँ-बाप का ....

इकलौती बेटियां
होती है बड़ी नालायक
जिन्हें नहीं आता ज़रा भी
छोड़ कर आगे बढ़ जाना
के वो नहीं हो पाती स्वार्थी
और बनना चाहती है कंधा पिता का...

इकलौती बेटियां
नहीं लेकर आती किस्मत
इकलौते बेटे सी
के कहते है इन बेटों से
ब्याही लड़कियों के खुल जाते है भाग्य
चली जाती है पांचों उंगलियां घी में ....

इकलौती बेटियों से
नहीं ब्याहे जाने चाहिए बेटे
जिन्हें पाला-पोसा जाता है
कलियों से भी ज़्यादा कोमलता से
के इन बेटियों से ब्याहने पर
हो जाती है उनकी ज़िंदगी बड़ी संघर्षरत....

इकलौती बेटियां
जो भी होती है
बस नहीं होती हृदयहीन
क्योंकि वो नहीं छोड़ पाती
अपनी परवरिश, पैदाईश को
वो ढोती है इन्हें अपने कंधे पर
श्रवण कुमार की तरह .......

©ज्योति