तुम स्त्री हो
तुम जब-जब सोचोगी
जीवन में स्नेह
तब-तब मिलेगा तुम्हें सब कुछ
सिवाय प्रेम के ....
अपना सब कुछ कर न्योछावर
जब तुम कहोगी प्रेम
तुम्हें मिलेगा जवाब-
नया कुछ नहीं है तुममें
तुम स्त्री हो फ़र्ज़ है तुम्हारा
पीड़ा की लहर से
जब ठहरने लगेगा शरीर
तुम कहोगी दर्द-
तुम्हें मिलेगा ताना
समय से पहले बुढ़िया होने का....
बिना किसी गलती के
मिलने पर सजा
जब तुम कहोगी अन्याय-
तुम्हें मिलेगा उलाहना
सहनशक्ति न होने का ....
अपने भीतर के बीज के
अंकुरण से पहले ही मर जाने पर
जब तुम कहोगी सेहत-
तुम्हें मिलेगी तुलना
विश्व भर की औरतों से ....
इन तानों, उलाहनों, तुलना से
जब थकोगी तुम
और कहोगी अब बस और नहीं-
तुम्हें मिलेगी तसल्ली
अपने लिए खुद खड़े होने की ...
©ज्योति
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