Monday, 26 June 2017

माई हमार

बाबू ,
गउवा हमार ,
नदिया के तीरे बा ,
कच्ची पुलिया पर से ,
लउकायेला ,
सोमेरवा के खेतवा ,
खेतवा के बीच से,
जायेले मेड़िया ,
पड़ी रहिया में ,
एगो बरगद के पेड़वा ,
टेक के मथवा ओहिजा ,
बरगदहा बाबा के लइके आशिर्वाद ,
चलिहा पुरुब के ओर ,
दिखे लागी तोहरा के ,
मड़ई नियर घर ,
चुल्हवा से उठत होई धुंआ ,
माई हमार ,
पकावत होई बाटी ,
निहारत होई रहिया ,
हमरे इन्जार में ,
बाबू हो ,
ओके प्यार से समझयिहा ,
बिटवा ओकर ,
करज चुका के माटी के ,
मिल गइल माटी में ,
देस के खाये न पावे गद्दार ,
ऐंही से ऊ खा के गोली ,
चल गइल बा ,
दुसरकी दुनिया में ,
बाबू ,
हाथ जोड़त बानी ,
माई के हमरे ,
रोवे न दिहा ,
माई के हमरे ,
रोवे न दिहा ....

©ज्योति

Saturday, 3 June 2017

लड़कियां किसी की सगी नही होती

लड़कियां ,
मुई चीज ही ऐसी है ,
किसी की सगी नही होती ,
बस आज तेरे साथ है ,
कल किसी और के साथ होगी ,
ध्यान भी देना जरा ,
होठों की मुस्कान उसकी ,
ज़रा भी कम न होगी ।

सच कहा न मैंने अभी ,
अब तो तुम सहमत होंगे ,
मेरी हर सही गलत बात से ,
तो सुनो मेरी एक और बात ,
लड़कियां आज भी ,
किसी की सगी नही होती ,
मायके की इज्ज़त तो ,
ससुराल में सज्जा का सामान होगी ...

लड़कियां प्रेम नही कर सकती ,
कर भी लिया तो निभा नही सकती ,
वो नही छोड़ सकती तुम्हारी तरह ,
लोक लाज और कुल की मर्यादा ,
सड़ती रहेंगी चार हाथ के घूंघट में ,
निभाती रहेंगी अपनी हर ज़िम्मेदारी ,
सहती रहेंगी नशेड़ी पति की मार ,
पर विरोध की बात कभी पैदा न होगी....

आज पढ़ती तो है लड़कियां ,
पर बढ़ती नही आगे ,
सोच उनकी भले आधुनिक हो ,
मगर जकड़ी है वो परम्परा की बेड़ियों में ,
तुम तो बस हारते हो उसका प्रेम ,
पर वो हारती है एक झटके में ,
प्रेम , विश्वास , आज़ादी अक्सर सांसे भी ,
ये बात तुमने न सोची होगी ....

अच्छा है ,
लड़कियां किसी की सगी नही होती ,
गर सगी होती तो ,
आज हर दिन हर लम्हा
एक क्रांति होती ,
आवाज़ उठती चीरती तुम्हारे कानो को ,
और तुम्हारी हर छोटी सोच की ,
वो कब्र खोद देती ....

©ज्योति