Monday, 24 October 2016

ख़ामोशी

सुनो ,
तुम सुन रहे थे अब तक मुझे ,
अब सुनना मेरी ख़ामोशी को ,
सच कहती हूँ ,
शब्दो से कहीं ज्यादा शोर ,
इन खामोशियों में है ,
बस तुम गौर से सुनना ,
के मेरे शब्द ,
अब बदल गए ख़ामोशी में ,
और मै ,
मै तो अब हूँ ही नही ,
जो तुम्हें दिखती है ,
वो तो बस सुनती है ,
देखती है ,
सहती है ,
पर कहती कुछ नही ,
और न अब कहेगी कभी ....

©ज्योति