Saturday, 10 October 2015

मै नही हम ...

हर पल ,
मै क्या सोचती हूँ ,
क्या महसूस करती हूँ ,
यही जानना जरूरी नही ,
जरूरी है  कि ,
हम जाने ,
हम क्या सोचते है ,
क्या महसूस करते है ,
और देखना ,
जब ऐसा होगा तो ,
ज़िन्दगी और भी ,
खूबसूरत हो जायेगी ....

Tuesday, 6 October 2015

मजबूरी

सब जानती हूँ ,
पर अनजान बने रहना ,
मजबूरी है मेरी ,
मजबूरी है साथ रहने की ,
मजबूरी क्या है ,
बेहतर होगा ,
तुम इससे अनजान रहो .....

जख़्म

मेरी कविता नुमाइश नही मेरे दर्द की ,
ये आईना है तेरे दिए ज़ख़्मों का ....

कुत्तों की पंचायत

आज गली के चौक पर,
कुत्तो की पंचायत हुई ,
मुद्दा था ,
लड़की की सुरक्षा का ,
बहस लम्बी चली ,
फैसला आया ,
अब कुत्ते लेंगे ,
अपनी गलियों की ,
लड़की की ज़िम्मेदारी ,
क्यूँकि ,
अब मनुष्य ,
इसके लायक न रहा ....

नंगा बदन या नंगी नज़र

नंगा बदन या नंगी नज़र

आज मैंने एक बदन देखा ,
खुला बदन ,
तन पर एक सूत नहीं ,
वो भाग रहा था ,
सबकी नज़रों से बचकर ,
पर नज़रे थी कि ,
उसका पीछा न छोड़ती ,
कभी कैमरे में ,
उसे कैद करती ,
तो कभी अश्लील कह दुत्कारती ,
मै खड़ी समझ रही थी ,
श्लील और अश्लील का अंतर,
पर समझ अब तक न आया,
नंगा वो आदमी था ,
नंगी थी नज़र..........े

Sunday, 4 October 2015

तन्हाई

अक्सर रात में हो ही जाती है ,
अपनी तन्हाई से मुलाक़ात ,
दिन के उजालो में तो ,
ज़नाज़ेे वाली भीड़ साथ होती है  ....

Saturday, 3 October 2015

पार्थ का आगमन

रक्त धमनियों में,
गुंथे-गुंथे से,
मेरे जीवन में ,
हे प्रिय !
तुम कौन आये ।।

नन्ही सी जान बनकर,
मेरे अस्तित्व से ,
जुड़ने वाले ,
हे प्रिय !
तुम कौन आये ।।

अपनी दुनिया में,
खोये से,
मेरी आँखों से,
देखने वाले ,
हे प्रिय!
तुम कौन आये ।।

नन्हें नन्हें हाथों से,
मातृत्व का ,
एहसास कराने वाले ,
हे प्रिय !
तुम कौन आये ।।

मीठी सी किलकारी बन ,
मेरे अन्तःमन में ,
गूंजने वाले,
हे प्रिय!
तुम कौन आये ।।

प्रिय !
तुम एक जान नहीं ,
मेरी छवि हो,
जो जीने की ,
वजह बन,
मेरी बगिया महकाने आये ।।