Saturday, 3 October 2015

पार्थ का आगमन

रक्त धमनियों में,
गुंथे-गुंथे से,
मेरे जीवन में ,
हे प्रिय !
तुम कौन आये ।।

नन्ही सी जान बनकर,
मेरे अस्तित्व से ,
जुड़ने वाले ,
हे प्रिय !
तुम कौन आये ।।

अपनी दुनिया में,
खोये से,
मेरी आँखों से,
देखने वाले ,
हे प्रिय!
तुम कौन आये ।।

नन्हें नन्हें हाथों से,
मातृत्व का ,
एहसास कराने वाले ,
हे प्रिय !
तुम कौन आये ।।

मीठी सी किलकारी बन ,
मेरे अन्तःमन में ,
गूंजने वाले,
हे प्रिय!
तुम कौन आये ।।

प्रिय !
तुम एक जान नहीं ,
मेरी छवि हो,
जो जीने की ,
वजह बन,
मेरी बगिया महकाने आये ।।

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