भीग गई हूँ आज भीतर तक,
बूँदों ने अहसास दिलाया,
भिगोया नहीं बारिश ने मुझे ,
भीगी हूँ प्रकृति के आंसू से।
ये रूदन इतना कर्णभेदी था ,
कि चीख रहा था बादल,
रो रही थी प्रकृति ,
थपेङे पवन के बनकर भाव ,
झकझोर रहे थे मुझे ,
भीगी नहीं आज बारिश में ,
भीगी हूँ प्रकृति के रोने सें ।
बूँदों ने अहसास दिलाया,
भिगोया नहीं बारिश ने मुझे ,
भीगी हूँ प्रकृति के आंसू से।
ये रूदन इतना कर्णभेदी था ,
कि चीख रहा था बादल,
रो रही थी प्रकृति ,
थपेङे पवन के बनकर भाव ,
झकझोर रहे थे मुझे ,
भीगी नहीं आज बारिश में ,
भीगी हूँ प्रकृति के रोने सें ।
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