लड़कियां ,
मुई चीज ही ऐसी है ,
किसी की सगी नही होती ,
बस आज तेरे साथ है ,
कल किसी और के साथ होगी ,
ध्यान भी देना जरा ,
होठों की मुस्कान उसकी ,
ज़रा भी कम न होगी ।
सच कहा न मैंने अभी ,
अब तो तुम सहमत होंगे ,
मेरी हर सही गलत बात से ,
तो सुनो मेरी एक और बात ,
लड़कियां आज भी ,
किसी की सगी नही होती ,
मायके की इज्ज़त तो ,
ससुराल में सज्जा का सामान होगी ...
लड़कियां प्रेम नही कर सकती ,
कर भी लिया तो निभा नही सकती ,
वो नही छोड़ सकती तुम्हारी तरह ,
लोक लाज और कुल की मर्यादा ,
सड़ती रहेंगी चार हाथ के घूंघट में ,
निभाती रहेंगी अपनी हर ज़िम्मेदारी ,
सहती रहेंगी नशेड़ी पति की मार ,
पर विरोध की बात कभी पैदा न होगी....
आज पढ़ती तो है लड़कियां ,
पर बढ़ती नही आगे ,
सोच उनकी भले आधुनिक हो ,
मगर जकड़ी है वो परम्परा की बेड़ियों में ,
तुम तो बस हारते हो उसका प्रेम ,
पर वो हारती है एक झटके में ,
प्रेम , विश्वास , आज़ादी अक्सर सांसे भी ,
ये बात तुमने न सोची होगी ....
अच्छा है ,
लड़कियां किसी की सगी नही होती ,
गर सगी होती तो ,
आज हर दिन हर लम्हा
एक क्रांति होती ,
आवाज़ उठती चीरती तुम्हारे कानो को ,
और तुम्हारी हर छोटी सोच की ,
वो कब्र खोद देती ....
©ज्योति
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