Friday, 10 June 2016

ख़्वाब पूरे नही होते

काश !
मै निभा सकती ,
वो सारे वादें ,
जो मै अक्सर करती हूँ ,
तुमसे ख्वाबो में ....
काश !
मै बैठती ,
तुम्हारे संग सागर किनारे ,
देखती उठ कर गिरती लहरें ,
और कहती ,
ये लहरें उतार चढाव है ,
हमारे जीवन के ,
जिन्हें हम साथ में देखेंगे...
काश !
मै चलती ,
तुम्हारे संग ,
कदम से कदम मिला ,
और बिता देते हम,
यूँ ही सारी ज़िंदगी ...
काश !
मै सुन पाती ,
वो मधुर गीत ,
जो तुम गाते ,
मेरे लिए सिर्फ़ मेरे लिए ,
और मै बस मुस्कुराती रहती...
काश !
ये सच हो पाता,
तो सोचो ,
हम कितने खुशनसीब होते ....
पर सुनो,
ये जो ख्वाब है न ,
ये पूरे नही होते ,
इसलिए बेहतर होगा ,
तुम और मै ,
हम न बने ,
बस जीते रहे ,
अपना अलग अलग व्यक्तित्व,
और इन ख्वाबो को ,
दफ़्न कर दे ,
दिल के किसी कोने में ....

No comments:

Post a Comment