सुनो ,
मै देख रही हूँ ,
आसमा के चाँद को ,
क्या देख रहे हो ,
तुम भी ,
मुझे तो दीखते हो तुम ,
क्या दिखती हूँ तुम्हे ,
मै भी ,
पता है आज हवा भी है ,
साथ साथ ,
फिसल रही है बालो से ,
मानो,
फेरी ही तुमने उंगलिया,
सच! सब कितना ,
खूबसूरत है न,
चाँद , हवा
और तुम्हारा एहसास ,
पर बताओ ज़रा,
कब बदलेगा ये एहसास ,
हक़ीक़त में ,
बोलो ,
सुन रहे हो न
सुना न तुमने ....
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