रंग दूँ आज,
खुद को ,
एक नए रंग में ,
बोलो,
कौन-सा रंग ,
पसन्द है तुम्हे ?
चुरा लू बदलो की स्याही ,
या कहो तो-
रंग जाऊ ,
उगते सूरज की लाली में ।
फूलों से मांग लू क्या ?
कुछ रंग उधार ,
या ले आऊँ ,
आसमां की वो ,
नीली चुनरिया ।
वैसे पीला कैसा रहेगा ,
याद है ,
बैठ घण्टो बतियाते ,
हँसते थे ,
सर्दी की उस पीली धूप में ..
तुम कहो तो,
गुलाबी में रंग लू ,
हाँ गुलाबी ,
पसन्द था न तुम्हे ,
सर्द हवाओ में ,
मेरे चेहरे का गुलाबी रंग...
कुछ कहते क्यूँ नही ,
क्या ये पीली धूप ,
गुलाबी रंग ,
कुछ याद नही तुम्हे ,
कही !
पसन्द तो नही आगया ,
कोई और रंग ...
No comments:
Post a Comment