Tuesday, 24 May 2016

मेरी कहानी (भाग-4)


मै ,
बढ़ती रही ,
कदम दर कदम ,
तुम घेरते रहे मुझे ,
साजिश दर साजिश ,
मै ,
बरसती रही ,
बूँद दर बूँद ,
तुम बहाते रहे मुझे ,
नदी दर नदी ,
मेरी ,
हर ख़ुशी पर ,
तुम डालते रहे,
अपनी नकामियत का बोझ,
मै ढोती रही इसे ,
मन्ज़िल दर मन्ज़िल ,
तुम माने नही फिर भी ,
और लगाते रहे ,
प्रश्नचिन्ह ,
मेरी कामयाबी पर ,
और मै ,
बढ़ती रही ,
बढ़ती रही ,
ये सोच ,
तुम आग बन जलते जाओ ,
मै हवा बन ,
तुम्हे बुझती जाउंगी ....

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