Thursday, 19 May 2016

कहो आओगे न-3

स्याही से बनी ,
इन रातो में ,
बन कर कुछ ख्वाब,
मेरी नींद में ,
कहो!
आओगे न ...

बन एक ,
सुरीली सी आवाज़ ,
देने अल्फ़ाज़ ,
ज़िंदगी के गीत को,
कहो!
आओगे न ...

बहते अश्क़ो को ,
कैद कर मुट्ठी में ,
बन कर मेरी ,
हँसी की वज़ह ,
कहो !
आओगे न ...

यादो के इस नशे में,
जब बेहकूँगी मै ,
सम्भालने मेरे ,
लड़खड़ाते कदमो,
कहो !
आओगे न ...

फ़िज़ा की शाम बन,
जब ढलूंगी मै ,
बन कर ,
एक नई सुबह,
कहो !
आओगे न ...

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