माँ,
तू नही बदली ,
हाँ,
तनिक नही बदली ,
वो ,
बाते छिपाने की आदत ,
यूँ ,
सब सहने की लत,
अब भी ,
न बदली ,
माँ ,
तू नही बदली ,
हाँ ,
तनिक नही बदली ....
तेरी ,
हर वो कोशिश ,
घर बचाने की ,
तेरे ,
रोज के पैंतरे ,
रिश्ते सजाने के ,
वैसे ही है ..
माँ ,
न तू बदली ,
न तेरी हसरते ,
बस ,
बदले तो ये रिश्ते ,
बदली तो ये दुनिया ,
पर तू ,
तू ,
बिल्कुल न बदली ...
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