Wednesday, 27 April 2016

कहानी (भाग-3)

सुनो,
अब आगे कहने को,
समर्थ नही हूँ,
के ,
एक बार फिर ,
नही ,
झेल सकती मै ,
वो सब,
जो मै झेल चुकी हूँ,
नही ,
याद कर सकती,
के ,
तुमने जब कहा -
"निशानी हमारे प्रेम की ,
प्रेम नही गलती है"
एक बात पूछूँ -
" ये गलती ,
अभी कब तक करोगे ,
रुकोगे कभी ,
या यूँही खेलोगे ,
खेल प्यार का,
और बोलोगे -गलती है ।"
हाँ ,
हाँ ,
हाँ,
ये गलती है ,
तुम्हारी नही मेरी ,
जो मै ,
हंसती रही ,
तुम्हारे हर खेल में ,
पर अब ,
अब और नही ,
के,
मै नही सह सकती,
तुम्हारे उठाये प्रश्नचिन्ह,
मेरे व्यक्तित्व पर ,
बस ,
आज के लिए ,
इतना ही ,
और जानना चाहो,
तो फिर आना ,
कभी ेदहलीज पर ,
कलेजा मजबूत कर अपना,
हां ,
कलेजा मजबूत कर,
के ,
तुम इतने सक्षम नही ,
जो सुन लो ,
वो सब ,
जो मै झेल चुकी हूँ ।

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