Thursday, 3 July 2014

मुझे पंख दे दो


अजन्मी अविकसित रह गई,
बेटे की चाह में ,
बलि चढ़ा दी गई ,
पर अब और नहीं ,
मुझे जन्म दे दो ,
माँ ! मुझे पंख दे दो ।
चूल्हा-चौंका झाङू-पोंछा ,
ये नहीं हैं किस्मत मेरी ,
नन्हीं-सी इन आंखो को ,
नए सपने दे दो ,
माँ ! मुझे पंख दे दो ।
दहेज छेङछाङ बलात्कार ,
अस्मिता मेरी रो रही ,
कर रहीं चीत्कार ,
इन कुरीतियों से मुक्ति दे दो ,
माँ ! मुझे जन्म दे दो ।
सरोजिनी कल्पना इंदिरा हो ,
या हो सायना सुभद्रा ,
देख तुम इनकी सफलता ,
मुझे किताब दे दो ,
माँ ! मुझे पंख दे दो ।
डोली मेरी अभी न उठाओ ,
एक साल मुझे और पढ़ाओ ,
झूठी इन बंदिशों को तोङ ,
मुझे आज़ादी दे दो ,
माँ ! मुझे पंख दे दो ।
 
 

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