जिस मिट्टी में जन्म लिया ,
आज मुझे वो चूम रही ,
माथे पर तिलक लगा ,
आज मझसे कह रही -
' तेरा लहू ज़ाया नहीं जाएगा ,
तेरी कुर्बानी के कारण ही ,
देश में नया सवेरा आएगा ।'
मैं सैनिक इस देश का ,
प्रण था ये मेरा ,
जां लुटा रणभूमि में ,
माँ कर्जं उतारूँगा तेरा ।
मौत अगर आई मुझे ,
प्यार से अपना लूँगा ,
माँ मुझे कसम हैं तेरी ,
चंद सिक्को की खातिर ,
मैं देश न बिकने दूँगा ।
देख माँ आज लिपटा हूँ ,
मैं तेरे इस आंचल से ,
नज़र उतार तू मेरी ,
अपनी आंखो के काजल से ।
जन्म दिया था ,
जिस कोख ने मुझे ,
उससे यहीं कहूंगा ,
अगले जन्म में ओ माँ ,
मैं तेरा बेटा ही बनूँगा ।
एक विनती हैं मेरी तुझसे ,
फिर अगर मै आया ,
तेरी इस कोख में ,
माँ मुझे तू भेजियो ,
फिर से रणसंग्राम में ,
जां बहुत छोटी हैं ,
इस देश के सम्मान में ।
जय हिंद
आज मुझे वो चूम रही ,
माथे पर तिलक लगा ,
आज मझसे कह रही -
' तेरा लहू ज़ाया नहीं जाएगा ,
तेरी कुर्बानी के कारण ही ,
देश में नया सवेरा आएगा ।'
मैं सैनिक इस देश का ,
प्रण था ये मेरा ,
जां लुटा रणभूमि में ,
माँ कर्जं उतारूँगा तेरा ।
मौत अगर आई मुझे ,
प्यार से अपना लूँगा ,
माँ मुझे कसम हैं तेरी ,
चंद सिक्को की खातिर ,
मैं देश न बिकने दूँगा ।
देख माँ आज लिपटा हूँ ,
मैं तेरे इस आंचल से ,
नज़र उतार तू मेरी ,
अपनी आंखो के काजल से ।
जन्म दिया था ,
जिस कोख ने मुझे ,
उससे यहीं कहूंगा ,
अगले जन्म में ओ माँ ,
मैं तेरा बेटा ही बनूँगा ।
एक विनती हैं मेरी तुझसे ,
फिर अगर मै आया ,
तेरी इस कोख में ,
माँ मुझे तू भेजियो ,
फिर से रणसंग्राम में ,
जां बहुत छोटी हैं ,
इस देश के सम्मान में ।
जय हिंद

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