शब्दो का मेल नहीं ,
तुम छवि हो मेरी ,
आईना हो मेरे भावो का ,
रच जाती हो मन में ,
किसी स्वप्न की भांति ,
सखी हो या हो विचारो की सरिता ,
पहचान तुम्हारी यही हैं ,
तुम हो मेरी अपनी कविता ।
तुम छवि हो मेरी ,
आईना हो मेरे भावो का ,
रच जाती हो मन में ,
किसी स्वप्न की भांति ,
सखी हो या हो विचारो की सरिता ,
पहचान तुम्हारी यही हैं ,
तुम हो मेरी अपनी कविता ।
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