इस चिलचिलाती धूप में,
बेच रहे हैं खिलोने ,
बीच सङक पर ,
छोटे-छोटे बच्चे ।
जब बिक जाते हैं खिलौने ,
तब बैठते हैं सङक किनारे ,
और जोङते है पैसे -
दो तीन चार और ये दस |
जाना हैं इन्हे अब ,
अपने शराबी मालिक के पास ,
देने अपने पैसे ,
मिल जाएगा इन्हे बदले में ,
सङा खाना गंदा पानी |
धूप में तपकर ,
पसीने में भीग कर ,
बिता रहे हैं जीवन ,
जो जीवन नहीं नरक हैं ।
खो गया हैं इनका बचपन कहीं ,
इस पर भी हम कहते हैं ,
चलो जी कोई बात नहीं ,
भूख के कारण करते हैं ये काम ,
कुछ और नहीं ये हैं बाल श्रम ,
जिसके लिए हम हैं ही बदनाम ।
रात में सो जाते हैं ,
वहीं फुटपाथ पर ,
नहीं सताता इन्हें मौत का डर ,
नहीं करता कोई इनका इंतज़ार ,
नहीं हैं इनका घर-परिवार ।
सुबह फिर उठना हैं इन्हें ,
बेचने हैं खिलौने ,
अपने लिए नहीं ,
अपने मालिक के लिए ,
उसकी शराब के लिए ।
बेच रहे हैं खिलोने ,
बीच सङक पर ,
छोटे-छोटे बच्चे ।
जब बिक जाते हैं खिलौने ,
तब बैठते हैं सङक किनारे ,
और जोङते है पैसे -
दो तीन चार और ये दस |
जाना हैं इन्हे अब ,
अपने शराबी मालिक के पास ,
देने अपने पैसे ,
मिल जाएगा इन्हे बदले में ,
सङा खाना गंदा पानी |
धूप में तपकर ,
पसीने में भीग कर ,
बिता रहे हैं जीवन ,
जो जीवन नहीं नरक हैं ।
खो गया हैं इनका बचपन कहीं ,
इस पर भी हम कहते हैं ,
चलो जी कोई बात नहीं ,
भूख के कारण करते हैं ये काम ,
कुछ और नहीं ये हैं बाल श्रम ,
जिसके लिए हम हैं ही बदनाम ।
रात में सो जाते हैं ,
वहीं फुटपाथ पर ,
नहीं सताता इन्हें मौत का डर ,
नहीं करता कोई इनका इंतज़ार ,
नहीं हैं इनका घर-परिवार ।
सुबह फिर उठना हैं इन्हें ,
बेचने हैं खिलौने ,
अपने लिए नहीं ,
अपने मालिक के लिए ,
उसकी शराब के लिए ।

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