Wednesday, 4 May 2016

कहानी (भाग-5)


ए सुनो ,
जाते जाते ,
बन्द कर जाना किवाड़ ,
के मै नही चाहती ,
अब तुम ,
और तुम्हारी ये यादें ,
घुस आये फिर ,
इस ज़िन्दगी में ,
और मै ,
मै बह जाऊ,
शब्दों के सागर में ,
हाँ ,
शब्दों के सागर में ,
जिसे अब तक ,
बांधे बैठी थी ।
यूँ देखो मत ,
और हाँ ,
घूरो भी नही ,
के मैंने डरना छोड़ दिया ,
और अब ,
अब तुम्हारी ये आँखे ,
मुझे डराती नही ,
बस इन्हें देख ,
मुझे याद आता है ,
तुम्हारा खेल ,
खेल प्यार का ,
जो तुम खेलते आये ,
चलो जाओ अब
चले जाओ ,
और कभी न झांकना ,
इस ज़िन्दगी में ,
जाओ ,
चले जाओ ,
दूर बहुत दूर ...

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