क्यूँ लौट आये तुम ,
मेरी इस ज़िन्दगी में ,
हा , इस ज़िन्दगी में ,
जहां घुटन होती थी तुम्हे ,
और तुम ,
निकलना चाहते थे ,
एक नया खेल खेलने ,
खेल दूसरी ज़िन्दगी का ,
जानती हूँ ,
मात मिली है तुम्हे ,
और तुम ,
तुम हताश हो ,
पर सुनो ,
मत सोचना अब ,
के तुम आओगे ,
रहोगे ,
खेलोगे ,
एक बार फिर इस ज़िन्दगी से ,
क्या कहा-
बदल गए हो तुम ,
हाँ , सच ही तो है,
बदल गए हो ,
पहले तुम खेलते थे मुझसे ,
और अब खेलते हो ,
मेरी यादो से ,
कुरेदते हो ,
नोंचते हो ,
अपने ही दिये ज़ख्मों को ,
पर अब और नही ,
जाओ ,
निकल जाओ ,
इस ज़िन्दगी से ,
के इसमें तुम्हारे खेलो की,
अब कोई जगह नही ।
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