Thursday, 6 April 2023

आज फिर सीता बन जाना चाहती हूँ ,
फ़ट जाये धरती तो समाना चाहती हूँ ,
बैठे है मेरे चार चार भाई अँगने में ,
वरना कपड़े सुखाने तो मै भी आना चाहती हूँ ....

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