आज फिर सीता बन जाना चाहती हूँ , फ़ट जाये धरती तो समाना चाहती हूँ , बैठे है मेरे चार चार भाई अँगने में , वरना कपड़े सुखाने तो मै भी आना चाहती हूँ ....
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