कभी झूम झूम बरसते हो तुम , कभी रेगिस्तान सा छोड़ देते हो , कभी सींचते हो धान सा तुम , कभी कैक्टस सा चुभने देते हो , जब जी आता है खेलते हो तुम , कभी रुमाल समझ रख देते हो ....
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