Sunday, 28 August 2016

पहाड़ नही नदी

मै पहाड़ नही ,
नदी होना चाहती हूँ ,
जड़ता नही ,
बहना चाहती हूँ ....

बहना चाहती हूँ ,
के सागर में मिलने को नही ,
दुनिया को देखना चाहती हूँ
मै पहाड़ नही ,
नदी होना चाहती हूँ ....

जीवन में ऊंचाई नही ,
गहराई चाहती हूँ,
मै निर्जन नही ,
जीवन बनना चाहती हूँ ...

बीहड़ जंगलो की ज़मीं नही ,
उस बीहड़ता से ,
गुजरना चाहती हूँ ,
मै पहाड़ नही ,
नदी होना चाहती हूँ ....

जानती हूँ नियति मेरी ,
मैला हो सूख जाना है ,
पर मै मन की मैल ,
बहाना जानती हूँ ...

मै पहाड़ नही ,
नदी होना चाहती हूँ,
मै जड़ता नही ,
बहना चाहती हूँ....

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