Friday, 22 April 2016

तुम कहाँ थे ?

भरे बाज़ार,
जब खोयी मैंने ,
अस्मित ,
तुम कहाँ थे ?
दर्द भरी चीख में ,
जब मैने लगाई ,
गुहार ,
तुम कहाँ थे ?
तन पर मेरे ,
जब बचा न कोई ,
चिथड़ा ,
तुम कहाँ थे ?
बोलो ,
है जवाब,
नही न ,
मै बताती हूँ ,
मोमबत्ती जला ,
बैठे थे तुम ,
किसी और ,
नग्न हुई आत्मा के लिए ।
काश!
तुम आजाते ,
तो बच जाती मै ,
पर तुम ,
तुम तो व्यस्त थे ,
नारीविमर्श का झंडा ,
गाड़ने में ...

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